ग्रीन लेबल गोल्ड चाय

जैक हर्बल चाय कई लोगो के लिये एक पसंदीदा पेय बन गयी है | वास्तव में लोग स्वाद और अविश्वसनीय औषधीय गुणों के कारण इनका सेवन करने लगे है | पिने में स्वादिष्ट होने के साथ – साथ यह पोषक तत्वों से भरी हुई है | यह न केवल आपके शारीर में तरल पदार्थ की पूर्ति करती है | बल्कि यह अतिरिक्त पोषक तत्वोसे युक्ता है | इसके इस्तामाल से DETOXIFICATION ( विषहरन ) होने लगता है और IMMUNITY POWER (रोग प्रतिरोधकता) बढ़ने लगता है | इसमें Anti-oxidant के गुण होते है, जो उम्र संबंधित बिमारियो से शारीर की रक्षा करने के लिये ऊतक कोशिकाओ को मजबूत करते है | प्रदूषको की वजह से सेल के नुकसान को रोकते है | जिससे स्थूलकाय मोटे-ताजे शरीर को छरहरा व् फुर्तीला बनाने में मदद मिलती है | साथ ही सर्दी-जुकाम से लड़ने में मासिकधर्म, प्रदर , ऐठन ,स्मरणशक्ति , मुत्रविकार , जोड़ो का दर्द, पेट की गड़बड़ी कम करने व् भूख को नियमित करने में मदद मिलती है |

यह भूक को दबाकर शारीर के लिए आवशक उर्जा की पूर्ति चर्बी के द्वारा करने में मदद करती है | इस वजह से कुछ दिनों तक आलस्य व सुस्ती जैसा महसूस होता है | ऐसा लगने पर कभी – कभी इसमें चुटकी भर सेधा नमक मिलाये |

यह कमजोर शारीर को स्वस्थ शारीर में बदलता है | शारीर के किसी भी हिस्से की फैट कम करने के लिये संबंधित योगा व् व्ययाम करने से जल्दी लाभ होता है |

विशेष : जब तक खुब भूक न लगे, कुछ न खाये |

क्या है हर्बल चाय ...

पारंपरिक चाय की तरह हर्बल चाय कैमेलिया सिनेसिस बुश वाले पैधे से नहीं बनती | यह विभिन्न ताजे फुल , फल , बिज , जड़ , छाल, पत्तो आदि को सुखाकर बनायीं जाती है |

क्या है इसकी विशेषता...

यह कैलरी फ्री होती है , यही कारन है की स्वस्थ शारीर के इच्छ्को में इसकी मांग लगातार बाद रही है | आम चाय की तरह हर्बल चाय में कैफीन जरा-सा भी नहीं होता | चाय के जो अवगुन है, वह हर्बल चाय में बिलकुल भी नहीं होते | हर्बल-टी Anti-oxidant या फ्लोवोनॉयड भरपूर मात्रा में होता है | जो र्हिदय रोग में लाभकारी है | फ्लोवोनॉयड खून को जमने से भी रोकता है और कैंसर की आशंका को कम करता है | शारीर के अन्य अंगो की ही तरह यह चेहरे पर जमा फैट कम करके चेजरे पर निखार लेन में मादद करता है |

इस्तेमाल का तरीका ....

1 ग्लास मीठे दूध में 3 - 5 ग्राम (1/1.5 टी-स्पून) दिन में २ बार जैक हर्बल पावडर को पारंपरिक चाय की तरह ही बनाये |
- पहले 4 दिन तक केवल एक ही वक्त ले |
- पाचवे दिन से सुबह-शाम दोनों समय ले |
- शुरुवात में इससे दो-तीन बार दस्त हो सकते है |

अगर आप भी हैं अंडरवेट, तो इस बीमारी के लिए रहें तैयार

1. संक्रमण का खतरा बना रहता है।
2. आसानी से एनीमिया हो सकता है।
3. हृदय संबंधी बीमारी होने का खतरा भी होता है। अंडरवेट होना उतना ही खतरनाक है, जितना कि मोटा होना है। लेकिन हम मोटापे को एक बीमारी के रूप में देखते हैं जबकि पतले होने को अच्छे स्वास्थ्य की निशानी मानते हैं। हकीकत ये है कि पतले होने से भी हमें कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। इससे पहले कि पतले होने की शारीरिक समस्याओं पर एक नजर डालें, यह जान लेना आवश्यक है कि आखिर अंडरवेट किसे कहते हैं? जिसका वजन औसत वजन से कम होता है। इसे बाॅडी मास इंडेक्स के जरिए भी समझा जा सकता है।

अंडरवेट होने की वजहें

अनुवांशिक
दवाएं
मानसिक समस्या
अंडरवेट होने के रिस्क
इम्युनि सिस्टम कमजोर होना
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप अंडरवेट हैं, तो इससे आपको इम्युनि सिस्टम प्रभावित होता है। इम्युनि सिस्टम वास्तव में आपकी देखरेख करता है,कई तरह की शारीरिक समस्याओं से बचाता है। असल में शरीर में जब फाॅरेन कंटामिनेंट्स घुसने की कोशिश करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपका इम्युन सिस्टम ही आपकी रक्षा करता है।

हृदय संबंधी बीमारी

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जो लोग बहुत ज्यादा पतले होते हैं यानी जो अंडरवेट होते हैं, उन्हें हृदय संबंधी बीमारी होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। हालांकि आमतौर पर यही माना जाता है कि मोटे लोगों में हृदय संबंधी बीमारियां होती हैं। जबकि अंडरवेट भी इससे अछूते नहीं होते।

डायबिटीज

डायबिटीज भी अंडरवेट लोगों को आसानी से अपनी चपेट में ले लेती है। दरअसल जो लोग अंडरवेट होते हैं, वे बहुत चीजें बिना सोचे समझे खा लेते हैं। नतीजतन वे आसानी से डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि अंडरवेट लोग कभी भी एक्सरसाइज या स्पोर्ट्स में रुचि नहीं दिखाते। जबकि ऐसा करना उनके स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।

एनीमिया

इसमें कोई दो राय नहीं है कि जो लोग अंडरवेट होते हैं, उन्हें एनीमिया आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लेता है। आपको बताते चलें कि एनीमिया एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें शरीर में रेड ब्लड सेल की प्रोडक्शन कम होती है। अतः जो लोग अंडरवेट होते हैं, वे अन्य लोगों की तुलना में कम होते हैं, नतीजतन उनके शरीर में आवश्यक न्यूट्रिएंट्स नहीं पहुंच पाते ताकि पर्याप्त मात्रा रेड ब्लड सेल प्रोड्यूस हो सके।

अन्य खतरे

बालों का झड़ना
-ओस्टियोपोरोसिस
-गर्भावस्था में जटिलताएं
-मासिक धर्म में समस्याएं
-संक्रमण का खतरा
हर रोज़ एक ही डाइट से हो सकती हैं हेल्थ प्रॉब्लम्स
बॉडी को नहीं मिलते हैं ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स
शरीर में ज़रूरी बैक्टीरिया बनने बंद हो जाते हैं इंफेक्शन से बचना चाहते हैं, तो फास्ट फूड को बिलकुल कहें न-न, शोध

बच्चों की ग्रोथ के लिए ज़रूरी

हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए अलग-अलग न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत होती है। लेकिन, अगर हम एक ही तरह का खाना हर रोज़ खाएंगे, तो किसी एक न्यूट्रिएंट की मात्रा शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा हो जाएगी, और यह बॉडी के लिए हानिकारक हो सकता है। चाहे बच्चे हों या बड़े, अलग-अलग तरह के पकवान से शरीर को सारे ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं। खासकर बच्चों की ग्रोथ के लिए तो यह बहुत ज़रूरी है, और अगर बड़े बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो भी मील में वैरायटी ज़रूरी है।

डाइजेशन में परेशानी

हर रोज़ एक ही चीज़ खाने से कई लोगों में देखा गया है कि वो उस खाने को ठीक से डाइजेस्ट नहीं कर पाते। यानी उनका मेटाबॉलिज़म वीक हो जाता है, और उन्हें पेट से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस दौरान, अगर वो कोई नई चीज़ भी खाते हैं, तो वो ठीक से पचती नहीं और पेट खराब होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसलिए, कहते हैं कि एकदम नई चीज़ बहुत ज़्यादा न खाएं। धीरे-धीरे खाएं और एक बार में एक नई चीज़ ही बॉडी को इंट्रोड्यूस करवाएं। यह ख़ासकर उन लोगों के लिए है जो हर रोज़ एक ही डाइट फॉलो करते हैं।

ज़रूरी बैक्टीरिया का विकास नहीं होता

कई लोगों को एक ही तरह का खाना खाने की आदत तब लगती है, जब वो डाइटिंग कर रहे होते हैं। लेकिन लिमिटिड डाइट से गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। दरअसल, अगर आप आज कुछ ऐसा खाते हैं, जिससे आपके शरीर को पूरे न्यूट्रिएंट्स न मिले हों, तो अगले दिन कुछ और खाकर उसकी कमी पूरी की जाती है। लेकिन, अगर आप वही चीज़ हर रोज़ खाते हैं, तो गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। यानी शरीर में लिमिटिड बैक्टीरिया ही पैदा होते हैं, और बॉडी की पूरी हेल्थ इम्बैलेंस हो जाती है। बैक्टीरिया का विकास शरीर की आंतों या गट में होता है, और एक ही डाइट से कई बैक्टीरिया पैदा ही नहीं होते। अगर आप हर रोज़ हेल्दी खाना खाते हैं, तो भी अपनी डाइट में वैरायटी रखें।